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Monday, 18 March 2019

भगत सिंह । Bhagat Singh l Bhagat Singh Biology In Hindi

Bhagat Singh Biography In Hindi - भगत सिंह जीवनी

नमस्कार मित्रों 
              ‌‌‌     आज हम बात करेंगे Shahid-E-Azam Bhagat Singh के बारे में। भगत सिंह भारतीय इतिहास में एक अमर बलिदानी के रूप में जाने जाते हैं। उनकी मिशाले आज भी दी जाती है। जब भी भारतीय स्वतंत्रता कि बात की जाती है, भगत सिंह को कोई नहीं भुला सकता। और एक अहम बात जब भी स्वतंत्रता मांगने की बात की जाती है तो लोग महात्मा गांधी को याद करते हैं, लेकिन जब भी स्वतंत्रता छिनने कि बात कही जाती है तो लोगों के जुबान में एक ही नाम होता है और वह है अमर शहीद भगत सिंह। भगत सिंह बस इतना ही चाहते थे कि भारत तथा भारत के लोग अंग्रेजों से स्वतंत्र हों। यह बात अंग्रेजी सरकार को मंजूर ना थी, और ना ही भगत सिंह को गुलामी मंजूर था।
Bhagat Singh Full Biography In Hindi


भगत सिंह जीवनी - Bhagat Singh Biography

नाम - भगत सिंह (Bhagat Singh)
जन्म तिथि - 27/28 सितंबर
जन्म स्थान - गांव - बंगा , जिला - लायलपुर, पंजाब                         (वर्तमान पाकिस्तान में है)
पिता जी - सरदार किशन सिंह
माता जी - श्रीमती विद्यावती कौर
भाई/बहन - करतार सिंह, राजेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह,                          सकुंतला कौर
आंदोलन - भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
फांसी - 23 मार्च 1931

भगत सिंह बचपन में :- 

भगत सिंह का जन्म एक सिख जाट परिवार में हुआ था। भगत सिंह का परिवार शुरू से ही स्वतंत्रता कि लड़ाई में शामिल था। पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह गदर पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। गदर पार्टी जो कि अमेरिका में निर्मित हुआ था, गदर पार्टी के सदस्य ब्रिटिश सरकार को भारत से बाहर निकलने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी। इस प्रकार भगत सिंह शुरू से ही स्वतंत्रता सेनानियों के साथ रहें, यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

भगत सिंह के बचपन की कुछ रोचक बातें

भगत सिंह बचपन से ही साहसी, पराक्रमी और कुशल बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण थे। भगत सिंह जब छोटे थे तब उनके मित्रों को दो समुहों में बांट कर युद्ध का अभ्यास करते रहते थे। भगत सिंह के इन्हीं क्रियाकलापों से पता चलता है कि वे कोई आम इंसान नहीं थे जो ब्रिटिश हुकूमत को ज्यादा दिन चलने देते।तभ तो इस महान आत्मा ने मात्र 23 साल की उम्र में अपने मौत को गले लगा लिया।


मैं आपको भगत सिंह के एक और घटना से ओत-प्रोत कराना चाहता हूं, वह घटना है 13 अप्रैल 1919 की जब लोग जलियांवाला बाग (अम्रितसर पंजाब) में शांतिपूर्ण सभा में उपस्थित लोगों पर जनरल डायर ने बिना कोई सुचना दिये गोली चलाने का आदेश दे दिया। यह स्थान जलियांवाला बाग तिन दिशाओं से बंद था जिसमें भारी भीड़ को भागने का मौका नहीं मिला।। इस घटना में घोर नरसंहार हुआ लगभग 1000+ से ज्यादा लोग मारे गए। इस घोर नरसंहार के निशान आज भी जलियांवाला बाग में देखा जा सकता है। भारतीय इतिहास में इसे जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।
जब यह घटना घटी भगत सिंह मात्र 12 वर्ष के थे, इस घटना की खबर लगते ही भगत सिंह 20 कि. मी. का रास्ता पैदल यात्रा करके घटना स्थल पहुंचे, और लोगों कि मदद की। और खून से सनी मिट्टी की कसम लेकर ब्रिटिश सरकार के खात्मा कि प्रतिग्या ली।

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